सोमवार, नवंबर 21, 2011

70 से लेकर 90% तक बच्चे रात में पैदा होते हैं

आप रेडियो लगाते हैं । और आवाज सुनाई पड़नी शुरू हो जाती है । क्या आप सोचते हैं । जब रेडियो लगाते हैं । तब आवाज आनी शुरू होती है ? आवाज तो पूरे समय बहती ही रहती है । आप रेडियो लगाएं । या न लगाएं । लगाते हैं । तब रेडियो पकड़ लेता है । बहती तो पूरे वक्त रहती है । दुनिया में जितने रेडियो स्टेशन हैं । सबकी आवाजें । अभी इस कमरे से गुजर रही हैं । आप रेडियो लगाएंगे । तो पकड़ लेंगे । आप रेडियो नहीं लगाते हैं । तब भी गुजर रही हैं । लेकिन आपको सुनाई नहीं पड रही हैं । आपको सुनाई नहीं पड़ रही हैं ।
जगत में न मालूम कितनी ध्वनियां हैं । जो चारों तरफ हमारे गुजर रही हैं । भयंकर कोलाहल है । वह पूरा कोलाहल हमें सुनाई नहीं पड़ता । लेकिन उससे हम प्रभावित तो होते ही हैं । ध्यान रहे । वह हमें सुनाई नहीं पड़ता । लेकिन उससे हम प्रभावित तो होते ही हैं । वह हमारे रोएं रोएं को स्पर्श करता है । हमारे हृदय की धड़कन धड़कन को छूता है । हमारे स्नायु स्नायु को कंपा जाता है । वह अपना काम तो कर ही रहा है । उसका काम तो जारी है । जिस सुगंध को आप नहीं सूंघ पाते । उसके अणु भी आपके चारों तरफ अपना काम तो कर ही जाते हैं । और अगर उसके अणु किसी बीमारी को लाए हैं । तो वे आपको दे जाते हैं । आपकी जानकारी आवश्यक नहीं है । किसी वस्तु के होने के लिए ।
ज्योतिष का कहना है कि हमारे चारों तरफ ऊर्जाओं के क्षेत्र हैं । एनर्जी फील्डस हैं । और वे पूरे समय हमें प्रभावित कर रहे हैं । जैसा मैंने कल कहा कि जैसे ही बच्चा जन्म लेता है । तो जन्म को वैज्ञानिक भाषा में हम कहें एक्सपोजर । जैसे कि फिल्म को हम एक्सपोज करते हैं । कैमरे में । जरा सा शटर आप दबाते हैं । एक क्षण के लिए कैमरे की खिड़की खुलती है । और बंद हो जाती है । उस क्षण में जो भी कैमरे के समक्ष आ जाता है । वह फिल्म पर अंकित हो जाता है । फिल्म एक्सपोज हो गई । अब दुबारा उस पर कुछ अंकित न होगा । अंकित हो गया । और अब यह फिल्म उस आकार को सदा अपने भीतर लिए रहेगी ।
जिस दिन मां के पेट में पहली दफा गर्भाधान होता है । तो पहला एक्सपोजर होता है । जिस दिन मां के पेट से बच्चा बाहर आता है । जन्म लेता है । उस दिन दूसरा एक्सपोजर होता है । और ये दोनों एक्सपोजर उस संवेदनशील चित्त पर फिल्म की भांति अंकित हो जाते हैं । पूरा जगत उस क्षण में बच्चा अपने भीतर अंकित कर लेता है । और उसकी सिम्पैथीज निर्मित हो जाती हैं ।
ज्योतिष इतना ही कहता है कि यदि वह बच्चा जब पैदा हुआ है । तब अगर रात है । और जान कर आप हैरान होंगे कि 70 से लेकर 90% तक बच्चे रात में पैदा होते हैं । यह थोड़ा हैरानी का है । क्योंकि आमतौर से 50% होने चाहिए । 24 घंटे का हिसाब है । इसमें कोई हिसाब भी न हो । बेहिसाब भी बच्चे पैदा हों । तो 12 घंटे रात । 12 घंटे दिन । साधारण संयोग और कांबिनेशन से ठीक है । 50-50 % हो जाएं । कभी भूल चूक 2-4 % इधर उधर हो । लेकिन 90% तक बच्चे रात में जन्म लेते हैं । 10% बच्चे मुश्किल से जन्म दिन में लेते हैं । अकारण नहीं हो सकती यह बात । इसके पीछे बहुत कारण हैं ।
समझें । 1 बच्चा रात में जन्म लेता है । तो उसका जो एक्सपोजर है । उसके चित्त की जो पहली घटना है । इस जगत में अवतरण की । वह अंधेरे से संयुक्त होती है । प्रकाश से संयुक्त नहीं होती । यह सिर्फ उदाहरण के लिए कह रहा हूं । क्योंकि बात तो और विस्तीर्ण है । सिर्फ उदाहरण के लिए कह रहा हूं । उसके चित्त पर जो पहली घटना है । वह अंधकार है । सूर्य अनुपस्थित है । सूर्य की ऊर्जा अनुपस्थित है । चारों तरफ जगत सोया हुआ है । पौधे अपनी पत्तियों को बंद किए हुए हैं । पक्षी अपने पंखों को सिकोड़ कर आंखें बंद किए हुए अपने घोंसलों में छिप गए हैं । सारी पृथ्वी पर निद्रा है । हवा के कण कण में चारों तरफ नींद है । सब सोया हुआ है । जागा हुआ । कुछ भी नहीं है । यह पहला इंपैक्ट है बच्चे पर ।
अगर हम बुद्ध और महावीर से पूछें । तो वे कहेंगे कि अधिक बच्चे इसलिए रात में जन्म लेते हैं । क्योंकि अधिक आत्माएं सोई हुई हैं । एस्लीप हैं । दिन को वे नहीं चुन सकते । पैदा होने के लिए । दिन को चुनना कठिन है । और हजार कारण हैं । और हजार कारण हैं । 1 कारण महत्वपूर्ण यह भी है । अधिकतम लोग सोए हुए हैं । अधिकतम लोग तंद्रित हैं । अधिकतम लोग निद्रा में हैं । अधिकतम लोग आलस्य में । प्रमाद में हैं । सूर्य के जागने के साथ उनका जन्म ऊर्जा का जन्म होगा । सूर्य के डूबे हुए अंधेरे की आड़ में । उनका जन्म । नींद का जन्म होगा ।
रात में एक बच्चा पैदा हो रहा है । तो एक्सपोजर 1 तरह का होने वाला है । जैसे कि हमने अंधेरे में एक फिल्म खोली हो । या प्रकाश में 1 फिल्म खोली हो । तो एक्सपोजर भिन्न होने वाले हैं । एक्सपोजर की बात थोड़ी । और समझ लेनी चाहिए । क्योंकि वह ज्योतिष के बहुत गहराइयों से संबंधित है ।
जो वैज्ञानिक एक्सपोजर के संबंध में खोज करते हैं । वे कहते हैं कि एक्सपोजर की घटना बहुत बड़ी है । छोटी घटना नहीं है । क्योंकि जिंदगी भर वह आपका पीछा करेगी । 1 मुर्गी का बच्चा पैदा होता है । पैदा हुआ कि भागने लगता है । मुर्गी के पीछे । हम कहते हैं कि मां के पीछे भाग रहा है । वैज्ञानिक कहते हैं । नहीं । मां से कोई संबंध नहीं है । एक्सपोजर । हम कहते हैं । अपनी मां के पीछे भाग रहा है । लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं । नहीं ! पहले हम भी ऐसा ही सोचते थे कि मां के पीछे भाग रहा है । लेकिन बात ऐसी नहीं है । और जब सैकड़ों प्रयोग किए गए । तो बात सही हो गई है ।
वैज्ञानिकों ने सैकड़ों प्रयोग किए । मुर्गी का बच्चा जन्म रहा है । अंडा फूट रहा है । चूजा बाहर निकल रहा है । तो उन्होंने मुर्गी को हटा लिया । और उसकी जगह 1 रबर का गुब्बारा रख दिया  । बच्चे ने जिस चीज को पहली दफा देखा । वह रबर का गुब्बारा था । मां नहीं थी । आप चकित होंगे । यह जान कर कि वह बच्चा एक्सपोज्ड हो गया । इसके बाद वह रबर के गुब्बारे को ही मां की तरह प्रेम कर सका । फिर वह अपनी मां को नहीं प्रेम कर सका । रबर का गुब्बारा हवा में इधर उधर जाएगा । तो वह पीछे भागेगा । उसकी मां भागती रहेगी । तो उसकी फिक्र ही नहीं करेगा । रबर के गुब्बारे के प्रति वह आश्चर्यजनक रूप से संवेदनशील हो गया । जब थक जाएगा । तो गुब्बारे के पास टिक कर बैठ जाएगा । गुब्बारे को प्रेम करने की कोशिश करेगा । गुब्बारे से चोंच लड़ाने की कोशिश करेगा । लेकिन मां से नहीं ।
45 वर्ष जब सूरज जवान होता है । उस वक्त जो बच्चे पैदा होते हैं । उनका स्वास्थ्य अदभुत रूप से अच्छा होगा । और जब 45 वर्ष सूरज बूढ़ा होता है । उस वक्त जो बच्चे पैदा होंगे । उनका स्वास्थ्य कभी भी अच्छा नहीं हो पाता । जब सूरज खुद ही ढलाव पर होता है । तब जो बच्चे पैदा होते हैं । उनकी हालत ठीक वैसी है । जैसे पूरब को नाव ले जानी हो । और पश्चिम को हवा बहती हो । तो फिर बहुत डांड चलाने पड़ते हैं । फिर पतवार बहुत चलानी पड़ती है । और पाल काम नहीं करते । फिर पाल खोलकर नाव नहीं ले जाई जा सकती । क्योंकि उलटे बहना पड़ता है । जब सूरज ही बूढ़ा होता है । सूरज जो कि प्राण है । सारे सौर परिवार का । तब जिसको भी जवान होना है । उसे उलटी धारा में तैरना पड़ता है । हवा के खिलाफ । उसके लिए संघर्ष भारी है । जब सूरज ही जवान हो रहा होता है । तो पूरा सौर परिवार शक्तियों से भरा होता है । और उठान की तरफ होता है । तब जो पैदा होता है । वह जैसे पाल वाली नाव में बैठ गया । पूरब की तरफ हवाएं बह रही हैं । उसे डांड भी नहीं चलानी है । पतवार भी नहीं चलानी है । श्रम भी नहीं करना है । नाव खुद बह जाएगी । पाल खोल देना है । हवाएं नाव को ले जाएंगी ।
इस संबंध में अब वैज्ञानिकों को भी शक होने लगा है कि सूरज जब अपनी चरम अवस्था में जाता है । तब पृथ्वी पर कम से कम बीमारियां होती हैं । और जब सूरज अपने उतार पर होता है । तब पृथ्वी पर सर्वाधिक बीमारियां होती हैं । पृथ्वी पर 45 साल बीमारियों के होते हैं । और 45 साल कम बीमारियों के होते हैं ।
नील ठीक 4000 वर्षों में । हर 90 वर्ष में इसी तरह जवान । और बूढ़ी होती रही है । जब सूरज जवान होता है । तो नील में सर्वाधिक पानी होता है । वह 45 वर्ष तक उसमें पानी बढ़ता चला जाता है । और जब सूरज ढलने लगता है । बूढ़ा होने लगता है । तो नील का पानी नीचे गिरता चला जाता है । वह शिथिल होने लगती है । और बूढ़ी हो जाती है । आदमी इस विराट जगत में कुछ अलग थलग नहीं है । इस सबका इकट्ठा जोड़ है । ओशो ।

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