शनिवार, सितंबर 18, 2010

सभी देवताओं में श्रेष्ठ कौन है ?


एक बार सारे ऋषि मुनियों में वाद विवाद हुआ कि सभी देवताओं में श्रेष्ठ कौन है ? इसकी परीक्षा करने हेतु भृगु ऋषि का चयन हुआ । क्योंकि भृगु उस समय ऋषियो में श्रेष्ठ थे । अतः उनसे कहा गया कि बृह्मा विष्णु महेश में कौन श्रेष्ठ है । इस बात का किसी युक्ति द्वारा पता लगायें ? जिससे उसे बडा माना जा सके । इसके लिये भृगु सबसे पहले बह्मलोक गये । वहां बृह्मा सृष्टि रचना के कार्य में लगे हुये थे । भृगु कुछ देर तक ये सब देखते रहे । बृह्मा ने उनको नमस्कार किया । तो भृगु ने कोई उत्तर या आशीष देने के स्थान पर लात के प्रहार से उनका सृष्टि निर्माण तोड डाला और बृह्मा की बहुत मेहनत बरबाद कर दी । बृह्मा को गुस्सा आ गया और वे भृगु की उठापटक मारामारी करने को तैयार हो गये । ये देखकर भृगु वहां से भाग गये । इसके बाद भृगु कैलाश पर्वत पर गय़े । जहां शंकर जी की कोठी बनी हुयी थी । महादेव और उनकी पत्नी पार्वती बातचीत कर रहे थे । भृगु पार्वती की पीठ पर जाकर बैठ गये । पार्वती चौंककर उठ गयी । भृगु फ़िर से उनके कंधों पर चढने की कोशिश करने लगे । शंकर जी ने भृगु का ये नाटक देखा । तो उन्हें बहुत गुस्सा आ गया । और वे भृगु को मारने त्रिशूल लेकर उनकी ओर लपके । शंकर जी भी उनके पीछे पीछे भागे । पर भृगु तेजी से भागकर रफ़ूचक्कर हो गये । इसके बाद भृगु क्षीरसागर स्थिति विष्णु के बंगले पर पहुंचे । जहां विष्णु शेषनाग के गुदगुदे बिस्तर पर as a water mattress लेटे हुये थे । और लक्ष्मी उनके पांव दबा रही थी । ( ज्यादातर धर्मशास्त्रों में ऐसा ही वर्णन मिलता है । एक बार मेरे मन में विचार आया । विष्णू को पत्नी अच्छी मिली जो फ़ालतू समय में उनके पांव दबाती रहती थीं । बृह्मा शंकर आदि इस मामले में इतने भाग्यशाली नहीं थे । एक बार इस मामले पर मेरी अपने दोस्तो से चर्चा हुयी । मैंने कहा । भाई लोगो । आपकी पत्नी जी आपके पैर दबाती हैं या नहीं ..सबका उत्तर यही था । ऐसे नसीब कहा भाई । अगर night को colourful बनाना हो तो उल्टा हमें पांव दबाना पडता है । हां गला दबाने को हमेशा तैयार रहती हैं । ) वहां भी भृगु ने जोरों की एक लात विष्णु की छाती पर मारी । विष्णु तुरन्त उठ बैठे और भृगु के पैरों को दबाने लगे । और बोले । आपके पैर अत्यन्त कोमल हैं । और मेरा सीना अत्यन्त कठोर । लात मारने से आपको चोट आयी होगी । इसका मुझे दुख है । भृगु इस नमृता के आगे झुक गये । और बोले । प्रभु मैं तो परीक्षा ले रहा था । वास्तव में आप देवताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं । क्षमा बडेन को चाहिये । छोटन को उत्पात । कहा विष्णु को घट गयो । भृगु जो मारी लात ।

2 टिप्‍पणियां:

kapil ने कहा…

MAIN BHAGWAAN KO NI MAANTA
MERA BLOG PAD KAR SHAYAD AAP BHI KUCH INFLUENSE HO JAAO
http://isitindya.blogspot.com/2010/08/vs-predator.html

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

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