शुक्रवार, अगस्त 13, 2010

आज के ज्योतिष में कितना दम है ?

मैंने कई शास्त्रों में युगों की आयु के बारे में अलग अलग पडा था । और लोग मुझसे प्रश्न भी करते थे । कि कलियुग की उमर कितनी है । और कितनी शेष है । अब भी मुझे इस बारे में ठोस जानकारी नहीं है ।
पर आत्मग्यानी संत और मेरे पूज्य गुरुदेव की सभी बातें अभी तक सही ही निकली । उससे मैं उनकी ही
बात को प्रामाणिक मानता हूं । कल शाम 13 अगस्त 2010 को जब महाराज जी मथुरा जा रहे थे । शाम को हम लोगों के आग्रह पर आगरा में रुक गये । तब किसी मौज में महाराज जी ने दो महत्वपूर्ण बातें पौराणिक शोधकर्ताओं हेतु बतायीं । एक तो कलियुग की आयु 28 000 बरस है । और दूसरे इस समय इन्द्र की पदवी पर प्रह्लाद है । वही प्रहलाद जो होलिका दहन के लिये प्रसिद्ध है । मेरी निगाह में ये दो तथ्य भी शोधकर्ताओं के लिये काफ़ी महत्वपूर्ण हैं । अभी में इस बात पर स्पष्ट नहीं हूं कि तीसरे तथ्य में मैंने जो सुना । वो पूरी तरह सही ही था । क्योंकि महाराज जी के साथ अन्य महात्मा भी थे और शिष्य लोग आ गये थे । इसलिये थोडा गम्भीर बातचीत का माहौल नहीं था । फ़िर भी महाराज जी ने तीसरा महत्वपूर्ण तथ्य ये बताया कि एक युग में चौदह मनु होते हैं । खैर ये तीनों तथ्य जो महाराज जी से कभी कभी ही मुश्किल से प्राप्त हो पाते हैं । मैं शोधकर्ताओं हेतु प्रकाशित कर रहा हूं । मैं कभी इस बात के लिये दवाव नहीं देता कि आप मेरी बात पूरी तरह आंख बन्द कर मानें । लेकिन जो संतो के माध्यम से प्राप्त दुर्लभ जानकारी जो मैं आपको देता हूं । उससे कई रहस्य अनायास ही खुल जाते है । क्योंकि आत्मग्यानी संत शास्त्र के हवाले से बात नहीं कहते । बल्कि निज अनुभव ग्यान के आधार पर कहते हैं । कल शाम को एक मजेदार बात ज्योतिष पर भी छिडी । वो बात ये थी कि त्रेता युग में महाराज दशरथ के कुलगुरु वशिष्ठ जिन्हें ज्योतिष का भी अच्छा ग्यान था । के तीन ज्योतिष ग्यान एकदम फ़ेल हुये । पहला । उन्होनें जब कैकयी का दशरथ के लिये विवाह प्रस्ताव आया । तो उन्होंने और अन्य पुरोहितों ने स्पष्ट कहा कि ये लडकी खानदान को बिलकुल मटियामेट कर देगी । लिहाजा विवाह प्रस्ताव नामन्जूर कर दिया गया । लेकिन होनी ज्योतिष से अधिक बलबान होती है । रावण की करामात से दशरथ जो अपनी परम्परा के अनुसार एक पत्नीवृत यानी एक ही विवाह करना चाहते थे । उनके तीन रानियों से एक साथ विवाह हुये । जिनमें कौशल्या और सुमित्रा सगी बहिनें थी । और कैकयी अलग थी । ( इस पूरे विवरण को विस्तार से जानने के लिये मेरी पोस्ट दशरथ के तीन विवाह कैसे हुये ? पढें ) यानी वशिष्ठ का ज्योतिष फ़ेल हो गया । दूसरा । जब राम का सीता के साथ विवाह हुआ । तो वशिष्ठ द्वारा राम सीता की कुन्डली मिलाने पर 36 गुण मिले और विवाह को सब प्रकार से उत्तम बताया गया । यानी सीता सुखी रहेगी । ये जोडा बेहद सफ़ल रहेगा ? ये बात वशिष्ठ का ज्योतिष कह रहा था । जनक के पुरोहितों आदि ने भी कुन्डली का मिलान किया होगा । अब सीता कितनी सुखी रही ? और ये शादी कितनी सफ़ल रही ? ये बताने की शायद आवश्यकता नहीं है ।
तीसरा । जब दशरथ ने राम को राजगद्दी देने का फ़ैसला किया । तब भी वशिष्ठ ने मुहूर्त आदि का मिलान करके उस समय को बहुत उत्तम घडी बताया । जिसमें राजतिलक होना था ? लेकिन यहां भी वशिष्ठ का
ज्योतिष फ़ेल हो गया । गद्दी की जगह वनवास हो गया । वो भी चौदह बरस का । वो भी एक की जगह
तीन तीन को । बाद में राम ने यह प्रश्न वशिष्ठ से किया भी कि आप तो कह रहे थे कि योग अच्छा बन रहा
है । फ़िर बुरा कैसे हो गया ? तब वशिष्ठ ने उत्तर दिया कि विधि का लिखा को मेटनहारा ? अब एक प्रश्न ये उठता है । कि वशिष्ठ अलौकिक ग्यान से कुन्डली को जानते थे और मात्र ज्योतिष किताबों का सहारा नहीं लेते थे । फ़िर भी फ़ेल हो गये । तो ज्योतिष की सार्थकता क्या है ? क्या वशिष्ठ आदि ग्यानियों और अन्य पुरोहितों को दशरथ एन्ड फ़ेमिली पर आने वाले संकट का ज्योतिष में कोई इशारा नहीं था । उपाय नहीं था ? कि उन्हें भी एकाध डायमण्ड बता देते ? कोई पूजा वूजा मन्त्र सन्त्र बता देते ? अब चलते चलते एक बात मेरी भी । एक बार एक मित्र के जरिये एक ज्योतिषी जो जोधपुर रिटर्न यानी जोधपुर से ज्योतिष सीखे हुये थे । मेरे पास आये और बहुत सी बातें बतानें लगे । जिनके जरिये ज्योतिष से हीरा पहनकर गिरता आसमान रोका जा सकता है । मैंने कहा मुझे एक नवजात बच्चे का बीस साल या चालीस साल का भविष्यफ़ल उसकी कुन्डली के सहित बनबाना है । वो खुशी खुशी तैयार हो गये । मैंने कहा । बच्चे की जन्मतिथि 23 मार्च 1969 है । और वो बच्चा मैं ही हूं । मैं अपने चालीस साल के जीवन में क्या क्या घट चुका है ? ये ज्योतिष के द्वारा जानना चाहता हूं । यानी लोग आगे की जानना चाहते हैं ? मैं पीछे की जानना चाहता हूं । और आपको फ़लादेश बताने के लिये सिर्फ़ जन्म तिथि और जन्म स्थान की आवश्यकता ही होती है । ज्योतिषी का मुंह फ़क पड गया । उस समय उच्च स्तर के विद्वान आठ लोग बैठे थे । अतः ज्योतिषी छोटे मोटे तर्क से काम नहीं चला सकते थे । खैर ज्योतिषी जी ने मेरी कुन्डली बनाने से इंकार कर दिया । मैं ज्योतिष का समर्थन या असमर्थन कुछ भी नहीं करता । पर आप ये बताइये कि मैंने जो कहा ।
वो क्या गलत था ? आप ये हिट आयडिया अपनाकर देखिये । और ज्योतिषी से आगे की बजाय पिछला
गुजर चुका समय पूछिये ? आपको पता चल जायेगा । आज के ज्योतिष में कितना दम है ?

2 टिप्‍पणियां:

चिट्ठाप्रहरी टीम ने कहा…

एक अच्छी पोस्ट लिखी है आपने ,शुभकामनाएँ और आभार

आदरणीय
हिन्दी ब्लाँगजगत का चिट्ठा संकलक चिट्ठाप्रहरी अब शुरु कर दिया गया है । अपना ब्लाँग इसमे जोङकर हिन्दी ब्लाँगिँग को उंचाईयोँ पर ले जायेँ

यहा एक बार चटका लगाएँ


आप का एक छोटा सा प्रयास आपको एक सच्चा प्रहरी बनायेगा

Sonal ने कहा…

कलियुग की आयु 28 000 बरस है , ye kaise sidh hota hai???

Meri Nayi Kavita aapke Comments ka intzar Kar Rahi hai.....

A Silent Silence : Ye Kya Takdir Hai...

Banned Area News : Tamil Cinema News

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