बुधवार, जून 30, 2010

गरीब की आरजू

यूँ तो बङाया आपने बहुत । एक गरीब का हौसला । पर हो न सका तय मेरे बूते । जीवन का ये फ़ासला । क्योंकि मुझसे बहुत दूर हैं । सर ! ये आसमां वो सितारे ।
उम्मीदों की दुनिंया । ख्वावों के मेले ।
यहाँ ठोकरें है बहुत । क्योंकि भीङ के हैं रेले ।
पूर्ण अपनत्व से बात सुनने का किसी के पास टाइम नहीं है ।
कोई है नहीं । कोई आया नहीं । कोई अभी नहीं । कोई कभी नहीं ।
ज्यादातर गये विदेश में । सर रहा नहीं अब कुछ भारत देश में ?
बालीबुड टू हालीबुड । बैड कंट्री । फ़ारेन गुड ।
हुआ पागल । कर कर डायल । थपेङों में कश्ती । दूर है साहिल ।
जेब दिमाग दोनों खाली ।
शक करते हैं घरवाले । रूठ गयी है घरवाली ।
सोचता हूँ सर ऐसा ही भला ।
गतिमंद क्या करेगा । धावक का मुकावला । नमो शिवाय । नमो मुरलीधर । इंगलिश में हेप्पी न्यू ईयर ।
सबको नववर्ष मंगलमय हो । सिर्फ़ एक दिन तो मेरा हो । ऐसा कोई सूर्योदय हो ।

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