बुधवार, मार्च 31, 2010

ग्यान के चार मार्ग..

अलौकिक ग्यान के तीन मार्ग हैं और आत्मग्यान का सिर्फ़ एक ही मार्ग है..इस विषय पर विद्धानों में काफ़ी मतभेद हो सकते हैं पर मेरा अनुभव तो यही कहता है. मैं किसी को बाध्य भी नहीं करता कि वो मेरी ही बात सही माने.. मैं सबसे नीचे से चलता हूँ..आप लोग खुद ही समझ सकते हैं कि सही क्या है..?
4-मीन मार्ग- मीन मछली को कहते हैं. यहाँ खास बात ये है कि मछली कितनी उँचाई तक जा सकती है और उसकी क्षमता क्या है..?
मछली दरअसल पानी की लहर के साथ ही ऊँचाई पर जा सकती है और जैसे ही लहर नीचे होगी . मछली नीचे आ जायेगी .
-- वास्तव में इसकी तुलना उन छोटे छोटे सिद्धों से की गयी है जो कि छोटी मोटी सिद्धि के द्वारा कुछ चमत्कारिक चीजें दिखलातें हैं . ये भी गिनती में बहुत नही होते पर अक्सर इनका मिल जाना कोई बङी बात भी नही है .
3-मरकट मार्ग- मरकट बंदर को कहते है . बंदर पेङ पर रहता है और जाहिर है कि उसकी पहुँच पेङ की सबसे ऊपर की डाली तक हो सकती है इससे ऊपर पहुँच पाना उसके लिये संभव नही है
--इस तुलना में भी सिद्धि ही आते है पर ये "मीन " की अपेक्षा काफ़ी शक्तिशाली होते है और कई प्रकार के असंभव कार्य कर सकते है . जैसे पानी पर चलना..आग पर चलना आदि हजारों प्रकार की नहीं बल्कि लाखों प्रकार की सिद्धियां होती है..ये योगी उनमें फ़ँस जाते हैं और योगमार्ग से पथभ्रष्ट हो जाते है..फ़िर भी ये
दुर्लभ ही होते हैं और अपनी सिद्धी के बल पर बिलासितापूर्ण जीवन जीते है और अंत में भक्ति के दुरुपयोग से इनको नरक की प्राप्ति होती है..पर अपने जीवनकाल में इनकी भगवान के समान पूजा होती है .
2-मकर मार्ग-मकर मकङी को कहते है..मकङी भले ही आपको एक छोटा जीव लगती हो पर इसकी विलक्षण खूबी पर आपका कभी ध्यान गया है ..ये अपना संसार खुद ही बना लेती है ये कहीं भी चली जाय इच्छा होते ही यह अपने मुँह से तार निकालती है और जाला बुनकर रहने लगती है..दूसरे ये अपने ही तार के सहारे बेहद ऊँचाई से उतर भी सकती है और चङ भी सकती है..ये तार निकालती भी है और स्वयं अपना तार खा भी जाती है..यानी रहने के लिये यह स्वयं पर ही निर्भर है..बस इसमें एक कमीं होती है कि अपना जाल ये बिना किसी सहारे (आधार ) के नही बना सकती है .
--तुलना..जाहिर है कि ऐसा योगी कितना शक्तिशाली होगा आप कल्पना नहीं कर सकते ..आप को वो किस्सा याद होगा कि एक राजा जीते जी स्वर्ग जाना चाहता था .वह वशिष्ठ जी के पास गया तो उन्होनें विनम्रता से मना कर दिया और विश्वामित्र जो उनसे चिङते थे ..इसी बात पर राजा को स्वर्ग में भेजने को तैयार हो गये..क्योंकि जीते जी स्वर्ग जाना नियम के विरुद्ध था..अतः दोनों में ठन गयी .विश्वामित्र ने उसे अपने योगबल से स्वर्ग की तरफ़ उठाया और वशिष्ठ ने उसे वहीं रोक दिया..और वह त्रिशंकु होकर लट्का रहा .बाद में विश्वामित्र ने अपनी बात रखने के लिये योगबल से एक अलग स्वर्ग (मकङी की तरह ) का निर्माण कर दिया..ये इसी मार्ग के योगी थे..ये बहुत ही दुर्लभ होतें हैं इसमें कोई सन्देह नहीं हैं .
1-विहंगम मार्ग--विहंगम पक्षी को कहते हैं..पक्षी के बारे में यहाँ ऊँचाई और पहुँच के लिये कहा गया है जाहिर है कि पक्षी आसमान की अनंत ऊँचाइयों में कहीं भी किधर भी आ जा सकता है वह अपनी इच्छा से एकदम प्रथ्वी पर और फ़िर अनंत आसमान में कहीं भी आ जा सकता है . यही संतो का मार्ग है..और यही मुक्ति का मार्ग भी है..आप स्वयंतुलना करे कि ऊपर के तीनों मार्गों की सीमाएं हैं और जब सीमा है तो बन्धन है..तो फ़िर आत्मा मुक्त कहाँ हुयी..इससे ज्यादा वताना वर्जित है..वास्तव में साधारण अवस्था में जीवों को अलौकिक ग्यान के बारे में अधिक बताना लाभ की जगह उनका नुकसान करना ही है और इसीलिये इसे प्रभु की आग्या से गुप्त रखा गया है..देखें गीता आदि धर्मग्रन्थ..जब जीव को आत्मा के उद्धार की चिंता होती है तव ये ग्यान गुरु द्वारा विधिवत दिया जाता है .

2 टिप्‍पणियां:

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ने कहा…

मेरा ब्लागिंग उद्देश्य गूढ रहस्यों को
आपस में बांटना और ग्यानीजनों से
प्राप्त करना भी है..इसलिये ये आवश्यक नहीं
कि आप पोस्ट के बारे में ही कमेंट करे कोई
दुर्लभ ग्यान या रोचक जानकारी आप सहर्ष
टिप्पणी रूप में पोस्ट कर सकते हैं ..आप सब का हार्दिक
धन्यवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

बेनामी ने कहा…

ham aur gayaan pana chahate hani {ranjeetsngh76@gmail.com}

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...