बुधवार, मार्च 31, 2010

तुलसी जा संसार को भयो मोतियाबिंद..

एक बार की बात है तुलसीदास जी सत्संग कर रहे थे . अचानक वे मौज में बोले..
घट में है सूझत नहीं लानत ऐसी जिन्द .
तुलसी जा संसार को भयो मोतियाबिंद ..
अर्थात वो सर्वव्यापी परमात्मा और कहीं नहीं तेरे इसी घट (शरीर) में तो है पर तुझे दिखाई नहीं देता . ऐसी जिन्दगी को लानत है..इस संसार को मोतियाबिंद हो गया है.
किसी शिष्य ने उत्सुकता से कहा..महाराज जी ये मोतियाबिंद हो तो गया अब कटेगा कैसे..? तुलसी ने उत्तर दिया..
सतगुरु पूरे वैध है अंजन है सतसंग .
ग्यान सराई जब लगे तो कटे मोतियाबिंद ..
अर्थात पूर्ण सतगुरु ही इसके वैध है और अंजन इसका सत्संग है..ये जब ग्यान रूपी सलाई से लगाया जाता है तो अग्यान रूपी मोतियाबिंद कट जाता है .
कस्तूरी कुंडल बसे म्रग ढूँढे वन मांहि .
ऐसे घट घट राम है दुनिया देखे नांहि ..
इसका अर्थ बताना जरूरी नही ..पर कभी कभी कितना आश्चर्य होता है..
मलहि कि छूटे मल के धोये , घ्रत पाव कोई वारि बिलोये .
अर्थात गन्दगी से गन्दगी नहीं छूटती और पानी को बिलोने(छाछ की तरह ) से घी नहीं निकलता .. ये सच है कि माचिस में आग है पर उसको जलाना पङेगा.. ये सच है कि दूध में घी है पर उसको निकालना पङेगा.. ये सच है कि परमात्मा तुम्हारे अंदर है .पर एक विशेष युक्ति से तुम्हें उससे मिलना होगा . जय गुरुदेव की..जय राम जी की ..

1 टिप्पणी:

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ने कहा…

मेरा ब्लागिंग उद्देश्य गूढ रहस्यों को
आपस में बांटना और ग्यानीजनों से
प्राप्त करना भी है..इसलिये ये आवश्यक नहीं
कि आप पोस्ट के बारे में ही कमेंट करे कोई
दुर्लभ ग्यान या रोचक जानकारी आप सहर्ष
टिप्पणी रूप में पोस्ट कर सकते हैं ..आप सब का हार्दिक
धन्यवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

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